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आमिना बीबी के गुलशन में आई है ताज़ा बहार | लोरी / Aamina Bibi Ke Gulshan Mein Aayi Hai Taza Bahar | Lori

Aamina Bibi Ke Gulshan Mein Aayi Hai Taza Bahar Lyrics in Hindi & English अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू आमिना बीबी के गुलशन में आई है ताज़ा बहार पढ़ते हैं सल्लल्लाहु व सल्लम आज दर-ओ-दीवार मदनी ! अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू बारह रबी'-उल-अव्वल को वो आया दुर्र-ए-यतीम माह-ए-नुबुव्वत, मेहर-ए-रिसालत, साहिब-ए-ख़ुल्क़-ए-'अज़ीम मदनी ! अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू हामिद-ओ-महमूद और मुहम्मद दो जग का सरदार जान से प्यारा, राज दुलारा, रहमत की सरकार मदनी ! अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू अव्वल-ओ-आख़िर सब कुछ जाने, देखे ब'ईद-ओ-क़रीब ग़ैब की ख़बरें देने वाला, अल्लाह का वो हबीब मदनी ! अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू प्यारी सूरत, हँसता चेहरा, मुँह से झड़ते फूल नूर सरापा, चाँद सा चेहरा, हक़ का प्यारा रसूल मदनी ! अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू जिब्रील आए झूला झूलाने, लोरी दे ज़ीशान सो जा सो जा, रहमत-ए-'आलम दो जग के सुल्तान ! मदनी ! अल्लाह अल्लाह अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हू ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी अल्लामा हाफ़ि...

मुबारक हो तुम सब को हज का महीना | मदीने वाले से मेरा सलाम कहना / Mubarak Ho Tum Sab Ko Hajj Ka Mahina | Madine Wale Se Mera Salam Kehna

मुबारक हो तुम को ये सफ़र-ए-मदीना न थी मेरी क़िस्मत कि देखूँ मदीना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा साहिल से आते आते मौजों को चूम लेना मौजों के बा'द दिलकश ज़र्रों को चूम लेना उस पाक सर-ज़मीं की राहों को चूम लेना फूलों को चूम लेना, काँटों को चूम लेना सुल्तान-ए-अंबिया से मेरा सलाम कहना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना मदीने वाले से मेरा सलाम कहना अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा मदीने क़ाफ़िले जाते हैं मैं भी आऊँगा हुज़ूर कितने ही आते हैं मैं भी आऊँगा चले सब यार फ़ी-अमानिल्लाह सू-ए-सरकार फ़ी-अमानिल्लाह अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा अल्लाहुम्मा लब्बैक अल्लाहुम्मा ग़ुलाम आप के कितने ग़रीब हो कर भी ग़ुलाम आते हैं जाते हैं, मैं भी आऊँगा लया मदीने दा सब ने रस्ता मैं एथे ई रह गया तरसदा तूँ जा के आक़ा नूँ दस्त-बस्ता कवीं दरूद-ओ-सलाम मेरा, सलाम मेरा सबा दर-ए-मुस्तफ़ा ते जा के कवीं दरूद-ओ-सलाम मेरा, सलाम मेरा मदावा रंज-ओ-मुसीबत का है मदीने में मुझे भी लोग सताते ह...

या रब्बना इर्हम-लना | तेरे घर के फेरे लगाता रहूँ मैं / Ya Rabbana Irhamlana | Tere Ghar Ke Phere Lagata Rahun Main

या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना तेरे घर के फेरे लगाता रहूँ मैं सदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना हरम में, मैं हाज़िर हुआ बन के मुजरिम ये लब्बैक ना'रा लगाता रहूँ मैं सदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना मैं लेता रहूँ बोसा-ए-संग-ए-अस्वद यूँ दिल की सियाही मिटाता रहूँ मैं सदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना इलाही ! मैं फिरता रहूँ गिर्द-ए-का'बा यूँ क़िस्मत की गर्दिश मिटाता रहूँ मैं सदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना लिपट कर गले लग के मैं मुल्तज़म से गुनाहों के धब्बे मिटाता रहूँ मैं सदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना बराहीम के नक़्श-ए-पा चूम कर मैं निगाहों से दिल में बसाता रहूँ मैं सदा शहर-ए-मक्का में आता रहूँ मैं या रब्बना ! इर्ह़म-लना, या रब्बना ! इर्ह़म-लना हतीम-ए-हरम में नमाज़ों को पढ़ कर तेरे दर पे दुखड़े सुनाता रहूँ मैं सदा ...

कहाँ हो या रसूलल्लाह कहाँ हो / Kahan Ho Ya Rasoolallah Kahan Ho

कहाँ हो, या रसूलल्लाह ! कहाँ हो मेरी आँखों से क्यूँ ऐसे निहाँ हो गदा बन कर मैं ढूँडूँ तुम को दर दर मेरे आक़ा ! मुझे छोड़ा है किस पर अगर मैं ख़्वाब में दीदार पाऊँ लिपट क़दमों से बस क़ुर्बान जाऊँ तमन्ना है तुम्हारे देखने की नहीं है इस से बढ़ कर कोई नेकी बसो दिल में, समा जाओ नज़र में ज़रा आ जाओ इस वीराना-घर में बना दो मेरे सीने को मदीना निकालो बहर-ए-ग़म से ये सफ़ीना मेरी बिगड़ी हुई हालत बना दो मेरी सोई हुई क़िस्मत जगा दो तुम्हारे सैकड़ों हम से गदा हैं हमारे आप ही इक आसरा हैं खिलाईं ने'मतें मुझ बे-हुनर को दिया आराम मुझ गंदे बशर को नहीं है साथ मेरे कोई तोशा कठिन मंज़िल, तुम्हारा है भरोसा खुलें जब रोज़-ए-महशर मेरे दफ़्तर रहे पर्दा मेरा, महबूब-ए-दावर ! मैं बे-ज़र, बे-हुनर, बे-पर हूँ, सालिक ! मगर उन का हूँ वो हैं मेरे मालिक शायर: मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी ना'त-ख़्वाँ: असद रज़ा अत्तारी अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी kahaa.n ho, ya rasoolallah ! kahaa.n ho meri aankho.n se kyu.n aise nihaa.n ho gada ban kar mai.n DhoonDoo.n tum ko dar dar mere aaqa ! mujhe chho.D...

मदीने मुझ को बुला लें बहुत उदास हूँ मैं / Madine Mujh Ko Bula Lein Bahut Udas Hun Main

मदीने मुझ को बुला लें, बहुत उदास हूँ मैं ग़म-ए-जहाँ से बचा लें, बहुत उदास हूँ मैं करम, हुज़ूर ! हो ऐसा कि सारा घर आए मेरा सवाल न टालें, बहुत उदास हूँ मैं मैं पिछले साल तो आक़ा मदीने आया था हुज़ूर ! फिर से बुला लें, बहुत उदास हूँ मैं उदासियों ने मेरे घर में डेरा डाला है उदासियों से बचा लें, बहुत उदास हूँ मैं बड़ी पनाह में आया जो आया तयबा में मेरी हयात बचा लें, बहुत उदास हूँ मैं नहीं है ग़ैर उजागर , ग़ुलाम आप का है गिरा पड़ा हूँ उठा लें, बहुत उदास हूँ मैं शायर: अल्लामा निसार अली उजागर ना'त-ख़्वाँ: अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी madine mujh ko bula le.n, bahut udaas hu.n mai.n Gam-e-jahaa.n se bacha le.n, bahut udaas hu.n mai.n karam, huzoor ! ho aisa ki saara ghar aae mera sawaal na Taale.n, bahut udaas hu.n mai.n mai.n pichhle saal to aaqa madine aaya tha huzoor ! phir se bula le.n, bahut udaas hu.n mai.n udaasiyo.n ne mere ghar me.n Dera Daala hai udaasiyo.n se bacha le.n, bahut udaas hu.n mai.n ba.Di panaah me.n aaya jo aaya ta...

जो इश्क़-ए-नबी के जल्वों को सीनों में बसाया करते हैं / Jo Ishq-e-Nabi Ke Jalwon Ko Seenon Mein Basaya Karte Hain

जो 'इश्क़-ए-नबी के जल्वों को सीनों में बसाया करते हैं अल्लाह की रहमत के बादल उन लोगों पे साया करते हैं जब अपने ग़ुलामों की आक़ा तक़दीर जगाया करते हैं जन्नत की सनद देने के लिए रौज़े पे बुलाया करते हैं मख़्लूक़ की बिगड़ी बनती है, ख़ालिक़ को भी प्यार आ जाता है जब बहर-ए-दु'आ महबूब-ए-ख़ुदा हाथों को उठाया करते हैं ऐ दौलत-ए-'इरफ़ाँ के मँगतो ! उस दर पे चलो जिस दर पे सदा दिन-रात ख़ज़ाने रहमत के सरकार लुटाया करते हैं गिर्दाब-ए-बला में फँस के कोई तयबा की तरफ़ जब तकता है सुल्तान-ए-मदीना ख़ुद आ कर कश्ती को तिराया करते हैं वो नज़'अ की सख़्ती हो, ऐ दिल ! या क़ब्र की मुश्किल मंज़िल हो वो अपने ग़ुलामों की अक्सर इमदाद को आया करते हैं है शुग़्ल हमारा शाम-ओ-सहर और नाज़, सिकंदर ! क़िस्मत पर महफ़िल में रसूल-ए-अकरम की हम ना'त सुनाया करते हैं शायर: सिकंदर लखनवी ना'त-ख़्वाँ: ओवैस रज़ा क़ादरी jo 'ishq-e-nabi ke jalwo.n ko seeno.n me.n basaaya karte hai.n allah ki rahmat ke baadal un logo.n pe saaya karte hai.n jab apne Gulaamo.n ki aaqa taqdeer jagaaya karte hai.n jannat...

ऐ ख़ालिक़-ओ-मालिक रब्ब-ए-उला सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह | तू रब है मेरा मैं बंदा तेरा / Aye Khaliq-o-Malik Rabb-e-Ula Subhanallah Subhanallah | Tu Rab Hai Mera Main Banda Tera

ऐ ख़ालिक़-ओ-मालिक रब्ब-ए-'उला ! सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह तू रब है मेरा मैं बंदा तेरा, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह हम मँगते हैं तू मो'अती है, हम बंदे हैं तू मौला है मोहताज तेरा हर शाह-ओ-गदा, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह हम जुर्म करें तू 'अफ़्व करे, हम क़हर करें तू मेहर करे घेरे है जहाँ को फ़ज़्ल तेरा, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह तू वाली है हर बेकस का, तू हामी है हर बेबस का हर इक के लिए दर तेरा खुला, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह राज़िक़ है मोर-ओ-मगस का तू, ग़फ़्फ़ार है नेक-ओ-बद का तू है सब पर तेरी जूद-ओ-'अता, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह हम 'ऐबी हैं सत्तार है तू, हम मुजरिम हैं ग़फ़्फ़ार है तू बद-कारों पर भी ऐसी 'अता, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह तेरे 'इश्क़ में रोए मुर्ग़-ए-सहर, तेरा नाम है मरहम-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर तेरे नाम पे मेरी जान फ़िदा, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह ये सालिक मुजरिम आया है और ख़ाली झोली लाया है दे सदक़ा रहमत-ए-'आलम का, सुब्हानल्लाह सुब्हानल्लाह शायर: मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी ना'त-ख़्वाँ: अल्लामा हाफ़िज़ बिलाल क़ादरी ai KHaaliq-o-maalik rabb-...

दामन में यूँ छुपा लो दिगर को ख़बर न हो | पुल से उतारो राह-गुज़र को ख़बर न हो तज़मीन के साथ / Daman Mein Yun Chhupa Lo Digar Ko Khabar Na Ho | Pul Se Utaro Rah Guzar Ko Khabar Na Ho With Tazmeen

दामन में यूँ छुपा लो दिगर को ख़बर न हो हूर-ओ-मलक को जिन्न-ओ-बशर को ख़बर न हो जन्नत में ऐसे पहुँचूँ सक़र को ख़बर न हो पुल से उतारो राह-गुज़र को ख़बर न हो जिब्रील पर बिछाएँ तो पर को ख़बर न हो बुझ जाए अब कहीं न चराग़ इंतिज़ार का जुज़ तेरे कोई और नहीं दिल-फ़िगार का जा-ए-ख़िज़ाँ में देख लूँ अब मुँह बहार का काँटा मेरे जिगर से ग़म-ए-रोज़गार का यूँ खींच लीजिए कि जिगर को ख़बर न हो उम्मत से प्यार तेरा न आए शुमार में रक्खा न एक पल भी कभी इंतिज़ार में बेचैन क़ल्ब आया उसी पल क़रार में फ़रियाद उम्मती जो करे हाल-ए-ज़ार में मुमकिन नहीं कि ख़ैर-ए-बशर को ख़बर न हो दर दर की ठोकरों से, ख़ुदाया ! बचा हमें सदक़ा हसन हुसैन का कर दे 'अता हमें दुनिया के रंज-ओ-ग़म से तू कर दे रिहा हमें ऐसा गुमा दे उन की विला में ख़ुदा हमें ढूँढा करे पर अपनी ख़बर को ख़बर न हो जिन का मक़ाम करते बयाँ हों शह-ए-ज़माँ कैसे फिर उन की शान बयाँ कर सके ज़बाँ ख़ुद मुस्तफ़ा ने मौला 'अली पर किया अयाँ फ़रमाते हैं ये दोनों हैं सरदार-ए-दो-जहाँ ऐ मुर्तज़ा ! 'अतीक़-ओ-'उमर को ख़बर न हो ये 'इश्क़ ही तो है जो सबक़ हम को ये पढ़ाए ये 'इश्क़ ...

हुसैन तुम को ज़माना सलाम कहता है / Hussain Tum Ko Zamana Salam Kehta Hai

Hussain Tumko Zamana Salam Kehta Hai Lyrics in Hindi & English हुसैन ! तुम को ज़माना सलाम कहता है तुम्हारे सज्दे को का'बा सलाम कहता है जलाल-ए-क़ुब्बा-ए-ख़ज़रा सलाम कहता है चमन का हर गुल-ओ-ग़ुंचा सलाम कहता है हुसैन ! तुम को ज़माना सलाम कहता है हुसैन ! तुम को ज़माना सलाम कहता है चराग़-ओ-मस्जिद-ओ-मिम्बर सलाम कहते हैं नबी, रसूल-ओ-पयम्बर सलाम कहते हैं 'अली-ओ-फ़ातिमा, शब्बर सलाम कहते हैं ख़ुदा गवाह कि नाना सलाम कहता है हुसैन ! तुम को ज़माना सलाम कहता है ख़ुदा की राह में सर को कटा दिया तुम ने नबी के दीन पे घर को लुटा दिया तुम ने निशान-ए-कुफ़्र को यकसर मिटा दिया तुम ने तुम्हें ख़ुदा भी तुम्हारा सलाम कहता है हुसैन ! तुम को ज़माना सलाम कहता है तुम्हें फ़लक के सितारे सलाम कहते हैं तुम्हें क़ुरआन के पारे सलाम कहते हैं तुम्हें हरम के मिनारे सलाम कहते हैं इमाम ! तुम को मदीना सलाम कहता है हुसैन ! तुम को ज़माना सलाम कहता है सना तुम्हारी वज़ीफ़ा है मेरा आबाई तुम्हारी मद्ह तो शेवा है मेरा, मौलाई ! बस इक नज़र हो जो मुझ पर तो मेरी बन आई तुम्हारा सय्यिद -ए-शैदा सलाम कहता है हुसैन ! तुम को...

आँखों को बंद कर लो आओ चलें मदीने / Aankhon Ko Band Kar Lo Aao Chalein Madine

तसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीना तसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीना हर वक़्त तसव्वुर में मदीने की गली हो फिर याद मुहम्मद की मेरे दिल में बसी हो आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने साहिल पे अब कहाँ हैं वो मुंतज़िर सफ़ीने आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने उतरे हुए मलक हैं तयबा की रहगुज़र में रिम-झिम गुलाब मंज़र सिमटे हैं चश्म-ए-तर में बाद-ए-ख़नक खड़ी है रस्ते के हर शजर में रहमत बरस रही है इस दिल-कुशा सफ़र में माथे पे झिलमिलाएँ ख़ुश्बू भरे पसीने आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने तसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीना तसव्वुर में मदीना, है यादों में मदीना मुश्ताक़ हैं निगाहें, बेताब चश्म-ए-तर है आँसू हैं चंद बाक़ी, सामान मुख़्तसर है इक रक़्स करती तितली हर शाख़-ए-नूर पर है ऐ दिल ! सँभल, नबी का रौज़ा क़रीब-तर है झुक झुक के दें सलामी अश्कों के आबगीने आँखों को बंद कर लो, आओ चलें मदीने ख़ुश-बख़्त मेरी आँखो ! ये शहर-ए-मुस्तफ़ा है सुल्तान-ए-दो-जहाँ का दरबार आ गया है देहलीज़-ए-मुस्तफ़ा से लिपटी हुई दु'आ है हर हर्फ़-ए-इल्तिजा में मेरी भी इल्तिजा है दिल में छुपे हुए हैं, आक़ा ! कई दफ़ीने ...